IPO में Selling Shareholders कौन होते हैं?
OFS से अलग Practical तरीके से समझें कि पैसा किसे मिलता है
जब कोई कंपनी IPO लेकर आती है, तो एक सवाल अक्सर investors के मन में आता है—
“IPO में जो करोड़ों रुपये जुटाए जा रहे हैं, वह पूरा पैसा कंपनी को मिलता है?”
जवाब है—जरूरी नहीं।
कई IPO में कंपनी के साथ-साथ उसके पुराने shareholders भी अपने shares बेचते हैं। ऐसे shareholders को कहा जाता है Selling Shareholders।
यहीं से एक बहुत important बात समझ आती है—
IPO में shares बिकने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि पैसा कंपनी के पास जा रहा है।
आइए इसे एक आसान example से समझते हैं।
Selling Shareholder कौन होता है?
मान लीजिए किसी कंपनी के एक Founder के पास कंपनी के 20 लाख shares हैं।
कंपनी IPO ला रही है और Founder अपने पुराने shares में से 5 लाख shares IPO में बेचने का फैसला करता है।
अब Founder इस IPO में Selling Shareholder है।
क्योंकि वह कंपनी को नए shares जारी करने के लिए पैसा नहीं दे रहा, बल्कि अपने पास पहले से मौजूद shares investors को बेच रहा है।
इस तरह IPO में दो अलग-अलग तरह की स्थिति हो सकती है:
अब सबसे जरूरी सवाल—पैसा किसे मिलता है?
इसे ₹100 के simple example से समझिए।
मान लीजिए IPO में आपके द्वारा खरीदा गया ₹100 का share Selling Shareholder के पुराने shares में से है।
तो उस ₹100 की बिक्री से मिलने वाली रकम Selling Shareholder के हिस्से में जाती है, कंपनी के business expansion fund में नहीं।
यानी:
Investor → ₹100 → Selling Shareholder
जबकि Fresh Issue में:
Investor → ₹100 → Company
यही दोनों के बीच सबसे बड़ा practical difference है।
क्या Selling Shareholder हमेशा Promoter होता है?
नहीं।
Selling Shareholder कोई Promoter हो सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि हर Selling Shareholder Promoter ही हो।
यह कोई existing shareholder हो सकता है, जैसे:
- Promoter
- शुरुआती investor
- Private Equity / Venture Capital investor
- अन्य existing shareholder
जिसके पास IPO से पहले से कंपनी के shares मौजूद हैं और वह IPO के दौरान उनमें से कुछ या सभी shares बेच रहा है।
OFS और Selling Shareholder में क्या फर्क है?
यहाँ एक छोटी-सी बात समझना बहुत जरूरी है।
Selling Shareholder = कौन shares बेच रहा है?
OFS = shares बेचने का तरीका/structure
उदाहरण के लिए—
अगर किसी कंपनी के Promoter ने अपने पुराने 10 लाख shares IPO में बेच दिए, तो Promoter Selling Shareholder है।
और उसके पुराने shares की बिक्री Offer for Sale (OFS) के जरिए हो रही है।
इसलिए दोनों शब्द एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन एक जैसे नहीं हैं।
Investor के लिए यह जानना क्यों जरूरी है?
क्योंकि IPO का headline देखकर अक्सर ऐसा लगता है—
“कंपनी ₹1,000 करोड़ जुटा रही है।”
लेकिन असली तस्वीर कुछ और हो सकती है।
मान लीजिए IPO का कुल size है:
₹1,000 करोड़
जिसमें:
तो कंपनी को अपने business के लिए मिलने वाली रकम ₹1,000 करोड़ नहीं, बल्कि ₹600 करोड़ होगी।
बाकी ₹400 करोड़ उन existing shareholders को मिलेंगे जिन्होंने अपने shares बेचे हैं।
यही वजह है कि IPO का पूरा issue size देखकर कंपनी के पास आने वाली रकम का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए।
एक और Practical Example
मान लीजिए ABC Ltd. का IPO ₹2,000 करोड़ का है।
इसमें:
- Fresh Issue = ₹800 करोड़
- OFS = ₹1,200 करोड़
अब headline हो सकती है—
“ABC Ltd. का ₹2,000 करोड़ IPO”
लेकिन investor को यह देखना चाहिए कि कंपनी वास्तव में कितना नया पैसा जुटा रही है।
यहाँ कंपनी को Fresh Issue से ₹800 करोड़ मिलेंगे।
जबकि ₹1,200 करोड़ existing shareholders को shares बेचने से मिलेंगे।
इसलिए IPO पढ़ते समय सिर्फ Issue Size देखना काफी नहीं है।
Fresh Issue और OFS का breakup देखना भी जरूरी है।
क्या बड़ा OFS होना खराब संकेत है?
जरूरी नहीं।
यह मान लेना गलत होगा कि बड़ा OFS मतलब कंपनी खराब है।
कई बार पुराने investors कई वर्षों से कंपनी में invested होते हैं और IPO के जरिए अपनी investment का कुछ हिस्सा निकालना चाहते हैं।
Promoter भी अपनी हिस्सेदारी को निर्धारित सीमा तक कम कर सकता है।
इसलिए केवल OFS देखकर IPO को अच्छा या खराब नहीं कहा जा सकता।
लेकिन investor को यह जरूर समझना चाहिए कि—
IPO से कंपनी को कितना पैसा मिलेगा और existing shareholders कितना पैसा निकाल रहे हैं।
IPO में Selling Shareholders को पहचानें कैसे?
IPO के DRHP/RHP और offer documents में आपको Selling Shareholders की जानकारी मिल सकती है।
वहाँ यह देखा जा सकता है कि:
- कौन shareholder shares बेच रहा है?
- कितने shares बेच रहा है?
- IPO के बाद उसकी holding कितनी बचेगी?
- कितनी हिस्सेदारी कम हो रही है?
यह information investor को IPO की ownership structure समझने में काफी मदद करती है।
Investor के लिए 3 सवाल सबसे जरूरी
किसी भी IPO को पढ़ते समय इन तीन सवालों को जरूर पूछें:
1️⃣ कंपनी कितना नया पैसा जुटा रही है?
इसके लिए Fresh Issue देखें।
2️⃣ पुराने shareholders कितना पैसा निकाल रहे हैं?
इसके लिए OFS देखें।
3️⃣ कौन shares बेच रहा है?
इसके लिए Selling Shareholders देखें।
इन तीन चीजों को समझने के बाद IPO की तस्वीर काफी साफ हो जाती है।
Bottom Line
IPO सिर्फ कंपनी के लिए पैसा जुटाने का माध्यम नहीं होता।
कई बार IPO के जरिए existing shareholders भी अपने shares बेचकर अपनी investment का एक हिस्सा cash में बदलते हैं।
इसलिए अगली बार जब आप किसी IPO के बारे में पढ़ें और लिखा हो—
“₹2,000 करोड़ का IPO”
तो तुरंत यह मत मानिए कि कंपनी के पास पूरे ₹2,000 करोड़ जाएंगे।
पहले देखें:










